मथुरा में बुखार का कहर: 15 दिन में 11 बच्चों सहित 17 लोगों की मौत, लड़खड़ाई स्वास्थ्य व्यवस्था

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लड़खड़ाई स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण मथुरा में वायरल, डेंगू के बाद बुखार का कहर बढ़ रहा है। फरह के गांव कोह से शुरू हुआ मौत का सिलसिला जचौंदा होते हुए नौहझील के नावली तक पहुंच गया है। गांव-गांव सैकड़ों लोग बीमार हैं। केंद्रीय और प्रदेश स्तर की टीमें कोह में डेरा डाले हुए हैं। हर दिन सैकड़ों लोगों के सैंपल भेजे जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी तक इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है कि मौत किस बीमारी से हो रही है। पिछले 15 दिन में  बुखार से मरने वालों की संख्या 17 तक पहुंच गई है। इनमें 11 बच्चे शामिल हैं। बीते 16 अगस्त से फरह के गांव कोह में बीमारी से लोगों के मरने का सिलसिला शुरू हुआ। गांव कोह में तीन दिन में छह बच्चों सहित आठ लोगों की बुखार से मौत हो गई। गुरुवार तक 11 बच्चों और एक महिला की मृत्यु हो चुकी है। कोह और पिपरौठ में सौ से अधिक लोगों में डेंगू के लक्षण मिले हैं। वहीं कोह में स्क्रब टाइफस के 26 मरीजों के अलावा बुधवार को 42 मरीजों में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि हुई है।

गोवर्धन के जचौंदा और सकरवा में भी बुखार ने कहर बरपा रखा है। जचौंदा में दो पुरुष, एक महिला और एक दो वर्ष के बच्चे की मौत बुखार से हो चुकी है। जबकि सौ से अधिक लोगों में डेंगू और वायरल के लक्षण मिले हैं। वहीं नौहझील के गांव नावली में बीते पांच दिन में दो ग्रामीण जान गवां चुके हैं। सीएमओ डॉ.रचना गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग बीमारी को नियंत्रण करने में लगा है।

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ग्रामीणों ने दिया धरना
गांव कोह में गुरुवार को एक और बच्चे की मौत हो गई। इलाज की समुचित व्यवस्था न होने पर भड़के ग्रामीण धरने पर बैठ गए अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पहुंचीं सीएमओ का घेराव भी कर लिया और पुलिस से नोकझोंक भी हो गई। बाद में भाजपा विधायक कारिंदा सिंह के आश्वासन पर धरना समाप्त किया। उधर, स्वास्थ्य विभाग बीमारी पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा है और बीमार लोगों को पेरासिटामोल देकर इतिश्री कर रहा है। कोह में मरने वालों की संख्या अब तक 11 हो चुकी है।

गांव कोह निवासी राजा (12) पुत्र हरिश्चंद्र की आगरा के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक बालक के पिता हरिश्चंद्र ने बताया कि बच्चे के पेट में दो दिन से दर्द था। फरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर ने दो टैबलेट दी थीं। इसके बाद भी बच्चे की तबियत बिगड़ती चली गई। आगरा में उपचार के दौरान बृहस्पतिवार को बेटे ने दम तोड़ दिया।

बच्चे के दाह संस्कार के बाद आक्रोशित ग्रामीण प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में धड़ाधड़ मौतें हो रही हैं। इलाज की समुचित व्यवस्था तक न हो सकी। उन्होंने सीएमओ डॉ. रचना गुप्ता का गांव पहुंचने पर घेराव भी किया। वहीं, गांव पहुंचे दो सिपाहियों से ग्रामीणों की नोकझोंक भी हो गई। भाजपा विधायक कारिंदा सिंह भी पहुंच गए और ग्रामीणों को समझाकर धरना समाप्त कराया। ग्रामीणों ने बताया कि कोह में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों लोग बुखार से पीड़ित हैं। वहीं, जिले में 40 लोगों में डेंगू की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है।

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जचौंदा में बृहस्पतिवार को 11 मरीज, जिनमें नीलम (35) पत्नी विजय सिंह, हरदयाल (44) पुत्र मोहर सिंह, सोहन सिंह (65) पुत्र चरण सिंह, पालेंद्र (36) पुत्र सादु, रोतान (62) पुत्र चरण सिंह, दानी (74) पुत्र हरिभजन, दानीराम (45) राम प्रसाद, महेंद्र (72) पुत्र देवीचंद्र, भगवत (25) पुत्र कैलाश, सोनियां (12) पुत्री धीरेंद्र, सरोज (35) पत्नी जगदीश आदि की जांच में डेंगू की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है। विजय राघव ने बताया कि पिंकी, कनिष्का, सीमा, गोविन्द, भूपेंद्र को बृहस्पतिवार को मथुरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया है।

जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर
बीमारी फैलने का मुख्य कारण गांव में व्याप्त गंदगी है। जचौंदा में सड़क किनारे गंदगी के ढेर लगे हैं। नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। लोग गंदे पानी से होकर निकलने पर मजबूर हैं। विजय ने बताया कि गांव में एक दिन सफाई व्यवस्था की गई थी। उसके बाद यहां कोई सफाई कर्मी नहीं आया। नालियों का गंदा पानी रास्ते में बह रहा है।

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