मॉब लिंचिंग का इतिहास, 15 बातें सिहरन पैदा कर देंगी

अजब- ग़ज़ब अपराध उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली : भीड़ द्वारा मौत की सजा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ‘मॉब लिंचिंग’ के बारे में आज हम आपको सबकुछ बता रहे हैं।

‘लिंचिंग’ शब्द विलियम लिंच के साथ जुड़ा है। कैप्टन विलियम लिंच का जन्म 1742 में वर्जिनिया में हुआ और मौत 1820 में।

विलियम कैप्टन लिंच ने एक न्यायाधिकरण बना रखा था और उसका वह जज था। विलियम का हर फैसला समाज में उन्माद फैलाने वाला होता था।

किसी भी आरोपी का पक्ष सुने बगैर व किसी भी न्यायिक प्रक्रिया का पालन किए बिना आरोपी को सरेआम मौत की सजा दी जाती थी। लिंचिंग का सबसे अधिक शिकार अमेरिका में अफ्रीकी मूल के लोग हुए।

सन 1882-1968 के बीच 3,500 से अधिक लोग मौत के घाट उतार दिए गए।

‘लिंचिंग’ शब्द सन 1780 में गढ़ा गया और इसका इस्तेमाल शुरू हुआ था। उस समय लिंचिंग सिर्फ अमेरिका तक सीमित था।

भारत में ‘लिंचिंग’ का प्रयोग राजनीतिक हथियार के रूप में होने लगा है।

लिंचिंग की घटनाओं का भारत स्वयं भुक्तभोगी बन गया है।

अमेरिका ने लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर सन् 1922 में लिंचिंग-रोधी कानून बनाया था।

1985 बैच के आईएएस अधिकारी 35 वर्षीय जी. कृष्णया जो गोपालगंज के तत्कालीन जिला अधिकारी थे, उन्हें उन्मादी भीड़ का शिकार होना पड़ा था। पत्थर मार-मारकर उनकी हत्या 1994 में कर दी गई।

दानापुर बीजेपी नेता सत्य नारायण सिन्हा की हत्या लाठी पिलावन रैली के दौरान 2003 में कर दी गई। यह हत्या भी भीड़ को उकसाने का ही परिणाम था।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 31 अक्टूबर 1984 को देशभर में हजारों सिखों की हत्या कर दी गई। समर्थकों में फूटे आक्रोश का शिकार सिख समुदाय हुआ, क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या उनके दो सिख सुरक्षा गार्डो-सतवंत और बेअंत सिंह ने की थी।

2002 में गुजरात में हुए दंगों में उन्मादियों ने ‘मॉब लिंचिंग’ के नमूने पेश किए थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री को वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री से कहना पड़ा था, “आपने राजधर्म नहीं निभाया।”

2006 में महाराष्ट्र के भंडारा जिले में लिंचिंग की घटनाएं हुई थीं, जिसे खैरलांगी जनसंहार के नाम से जाना जाता है। इसी साल दुष्कर्म के एक आरोपी को तेलंगाना के निजामाबाद जिले में पत्थर मार-मारकर हत्या कर दी गई थी।

2015 में नगालैंड के डिमापुर में लिंचिंग की घटना में एक दुष्कर्म के आरोपी को जेल का गेट तोड़कर 700 लोगों की भीड़ ने बाहर निकालकर निर्वस्त्र कर घसीटते हुए पूरे शहर में घुमाया और लाठी-डंडों से पीटकर उनकी हत्या कर दी।

2015 में उत्तर प्रदेश के दादरी में एक ओर जहां अखलाक को लिंचिंग का शिकार होना पड़ा, वहीं दूसरी ओर राजस्थान के अलवर में पहले पहलू खान को।

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