कोरोना पॉज़िटिव वीरेंद्र की सूझ-बूझ से परिवार तक नहीं पहुंचा संक्रमण

कोरोना पॉज़िटिव वीरेंद्र की सूझ-बूझ से परिवार तक नहीं पहुंचा संक्रमण

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प्रयागराज। प्रयागराज में कोरोना पॉज़िटिव केस के आकड़ें तेजी से बढ़ना चिंता का विषय है। रिकवरी रेट के स्तर में लगातार बढ़ोत्तरी सकारात्मक उम्मीद पैदा कर रही है। कोरोना से जंग जीत चुके कोरोना योद्धा वीरेंद्र ने कोरोना को मात दी है। वीरेंद्र की उम्र महज 38 साल है। जिनके परिवार में कुल 24 लोग हैं। जिसमें 12 बच्चे व एक बुजुर्ग शामिल हैं। वीरेंद्र को कोरोना संक्रमण अपने मित्र के संपर्क में आने से हुआ। जिसकी वजह से उन्हें करीब 12 दिन होम-क्वारंटाइन रहना पड़ा। जिनकी सूझ-बूझ से कोरोना का संक्रमण परिवार के किसी अन्य सदस्यों तक नहीं पहुंचा।

जानिए वीरेंद्र की जुबानी धैर्य के साथ सकारात्मक रह कर उन्होने कैसे दी कोरोना को मात। वीरेंद्र ने बताया की “प्रयागराज के मेरे साथी अवधेश (काल्पनिक नाम) कोरोना पॉज़िटिव थे इसकी जानकारी उन्हे भी नही थी। मैं उनसे पिछले दिनों मिला था जिसके दूसरे ही दिन सुबह मैं अपने कार्यालय के काम से अपने दो अन्य मित्रों व ड्राइवर के साथ चित्रकूट चला गया। जहां पहुँचने के बाद अवधेश ने सोशल मीडिया पर खुद के कोरोना पॉज़िटिव होने की पुष्टि की अपने संपर्क में आए लोगों को जांच करवाने की अपील की। इसके बाद मैं अपने सभी साथियों के साथ प्रयागराज रवाना हो गया। हमने प्रयागराज के केपी ग्राउंड में राज्य सरकार द्वारा लगे कैंप में अपनी कोरोना जांच करायी। जिसमें ड्राइवर सहित हम सभी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए। जिसके बाद मैं स्वास्थ विभाग के आदेशानुसार अपने घर के ही एक कमरे में क्वारंटीन हुआ। फिर प्रशासन के आला अधिकारियों ने मुझसे “यूपी होम आइशुलेशन” एप डाउनलोड करवाया व शुल्क लेकर मुझे एक हेल्थ किट भिजवायी । जिस किट में जांच संबंधी उपकरण, विटामिन सी व मल्टी विटामिन की दवा, गिलोय की धनवटी, मास्क व अन्य जरूरी सामान मुझे मिले। जिसका सेवन मैंने प्रतिदिन नियमतः किया। व किट में मिले उपकरण की सहायता से अपना रूटीन जांच कर प्रतिदिन की रिपोर्ट अप्लीकेशन के माध्यम से डॉक्टर्स तक भेजता रहा।

इस दौरान मैं अपने परिवार से फोन पर संपर्क में रहते हुए अपने स्वास्थ की हर जानकारी उन तक पहुंचाया। हालांकि मेरे सकारात्मक रवैये ने परिवार का हौसला बरकरार रखा। मैंने ऑनलाइन योगा कार्यशाला जॉइन की व मनोराञ्जन से जुड़ी फिल्में बुक आदि पढ़ा जिसने मेरा बहुत साथ दिया मुझे जरा भी अकेलेपन का एहसास नहीं होने दिया। जिसके बाद मेरे स्वास्थ को लेकर होते सुधार व किसी भी प्रकार के कोरोना लक्षण के ना मिलने के बाद मुझे 12 दिनों के अंदर दो बार डॉक्टर्स ने कोरोना निगेटिव करार दिया। मैंने फैसला किया है की मैं एक हफ्ते और होम क्वारंटीन रहूँगा। मुझे इस बात की खुशी है की मेरे अन्य साथी भी कोरोना निगेटिव हो गए हैं। कोरोना पॉज़िटिव से निगेटिव होने तक के सफर में मैंने यही जाना की कोरोना को हराना है तो अहतियात के साथ सकारात्मक रहना है बेहद जरूरी”।

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