April 9, 2020

एक साल में 70 हज़ार से अधिक चंपा के पौधे लगवा कर, बिहार को दी नई पहचान

कहते है कि अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं ये कहावत बिहार के सुशील कुमार पर सटीक बैठती है. कुछ साल पहले तक अपने इलाके में सुशील की पहचान 2011 में केबीसी के विनर के रूप में थी, जब उन्होंने पाँच करोड़ रुपए जीते थे। मगर अब सुशील चंपा वाले, पीपल और बरगद वाले हो गए हैं। वो कैसे ये भी हम आपको बता देते है.

सुशील कुमार ने पिछले एक साल में अभियान चला कर बिहार के चंपारण में 70 हजार के करीब चंपा के पौधे लगवाए हैं और आजकल पीपल और बरगद के पेड़ लगवाने के अभियान में जुटे हैं। चंपारण वही इलाका है जहां गाँधीजी ने 1917 में सत्याग्रह की शुरूआत हुई थी. और वहाँ के नील किसानों को अंग्रेजों के अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी। अब वह इलाका पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण नामक दो जिलों में बंट गया है, मगर क्षेत्र की पहचान चंपारण नाम से ही होती है। सुशील उसी पूर्वी चंपारण के मुख्य शहर मोतीहारी में रहते हैं और वे लगातार सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े हैं।

सुशील कुमार का कहना है कि उनका यह अभियान विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर 22 अप्रैल, 2018 को शुरू किया था। उस दौरान कुछ ही रोज पहले मोतीहारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चंपारण सत्याग्रह समापन समारोह में भाग लेने आए थे। उनके स्वागत में शहर में जोरदार अतिक्रमण हटाओ अभियान चला था, जिससे मोतीहारी की सड़कें खुली, काफी चौड़ी और साफ सुथरी लगने लगी थी। तब उन्होंने सोचा कि क्यों न इन खुली सड़कों के किनारे चंपा के पौधे लगाए जाए। शुरूआत में पूर्वी चंपारण जिले के पांच आइकॉनिक प्लेस पर चंपा का पौधा लगाया गया। फिर सिलसिला शुरू हो गया, लोग इस अभियान से जुड़ने लगे।

सुशील कहते हैं, “आज मोतीहारी शहर में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जहां चंपा का पौधा नहीं लगा होगा, पश्चिम चंपारण के इलाके में भी यह अभियान जोर पकड़ रहा है। हमारा लक्ष्य है कि चंपारण के सभी गाँवों में, सभी टोल्स पर चंपा के पौधे दिखे और इन पौधों को देख कर लोग समझ सके कि चंपारण का नाम आखिर क्यों चंपारण है।”

पीपल-बरगद बचाने के लिए भी शुरू किया अभियान
तकरीबन एक साल तक “चंपा से चंपारण” नामक इस अभियान को चलाने के बाद सुशील ने इस पर्यावरण दिवस को एक नया अभियान शुरू किया है। पिछले एक महीने में अब तक वे 94 पीपल, 4 बरगद के पौधे लगा चुके हैं। सुशील कुमार इस अभियान के जरिये मौसमी बदलाव, बारिश में आ रही कमी और प्रदूषण का मुकाबला करना चाहते हैं। उनका मानना है कि यह मुमकिन नहीं कि उनके सौ पेड़ लगाने से पर्यावरण सुरक्षित होगा,

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