सुप्रीम कोर्ट ने होम बायर्स को बड़ी राहत, घर खरीदारों का फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा बरकरार रखा

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सुप्रीम कोर्ट ने होम बायर्स को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने दिवालिया एवं ऋण शोधन अक्षमता संशोधन कानून को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद होम बायर्स को अधिक अधिकार मिल गए हैं। कोर्ट के फैसले के बाद किसी भी रियल एस्टेट कंपनी के डूबने या दिवालिया घोषित होने पर संपत्ति की नीलामी में घर खरीदारों को भी हिस्सा मिलेगा।

बता दे कि पिछले साल संसद ने इनसॉल्वेंसी एंड बैकरप्सी कोड संशोधन कानून पास किया था। जिसके तहत होम बायर्स और निवेशक भी दिवालिया घोषित कंपनी का कर्जदाता माना गया था। करीब 200 रियल एस्टेट कंपनियों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर की थी। याचिका में कंपनियों ने संसद के संशोधन को गैर कानूनी और असंवैधानिक ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनियों की याचिका को खारिज कर दिया है और केंद्र सरकार के आईबीसी संशोधन को सही ठहराया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद होम बायर्स को भी लोन देने वाले बैंकों के साथ फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा मिल चुका है। फैसले के बाद दिवालिया प्रक्रिया में होम बायर्स की सहमति भी आवश्यक हो गई है। इसके साथ ही अब घर खरीदार अब कर्जदाताओं की कमेटी में अपना पक्ष भी रख सकेंगे। और किसी कंपनी के खिलाफ दिवालिया घोषित करने के लिए प्रस्ताव भी दे सकेंगे।

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